Looking for an astrological solutions to your all problems ??

मिशन - "वरदान बनो"

मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ में आपका स्वागत है। मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ के प्रणेता है प्रसिद्ध ज्योतिर्विद्, आध्यात्मविद्, शिक्षाविद् और विचारक पूज्य गुरुदेव ड़ॉ. सर्वेश्वर शर्मा।

मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ एक सामाजिक और आध्यात्मिक मिशन है। यह मिशन सम्पूर्ण मानव जगत् की सांसारिक उन्नति और विकास के साथ-साथ मनुष्य की आन्तरिक चेतना के विकास और उन्नति के लिये भी कार्य कर रहा है। किसी भी मनुष्य या मानव समाज के विकास और उन्नति के दो पक्ष होते हैं- एक सांसारिक उन्नति और दूसरी आन्तरिक चेतनात्मक आध्यात्मिक उन्नति। इन दोनों पक्षों के समुचित विकास से ही व्यक्ति या समाज इस जगत के लिए वरदान बनता है । सामाजिक उन्नति वस्तुओं, व्यक्तियों और सामाजिक वातावरण पर आधारित है और आत्मिक आध्यात्मिक उन्नति, आन्तरिक चेतना पर आधारित है। जब मनुष्य सांसारिक और आत्मिक या आध्यात्मिक उन्नति को सन्तुलित प्रकार से प्राप्त करता है तो वह इस संसार के लिये एक वरदान बनता है ।

मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ की आवश्यकता-

सांसारिक आवश्यकता- ईश्वर ने हमें जीवन का वरदान दिया है यह जीवन हमारे लिए ईश्वर प्रदत्त एक वरदान है। लेकिन इस जीवन को वास्तविक अर्थों में वरदान सिद्ध करने के लिए आवश्यक है हमारा सम्पूर्ण विकास और समृद्धि।

हम आज मनुष्य और समाज में विभिन्न प्रकार की समस्याओं, कुरीतियों और आदतों को देखते हैं जैसे- दूषित प्राकृतिक पर्यावरण अशिक्षा, बाल विवाह, भ्रूण हत्या, बाल मजदूरी, गन्दगी, नशे की प्रवृत्ति, दिशाहीन विचार, अपव्यय, स्वार्थ, मानसिक अशान्ति, भेदभाव, छुआछूत, आपराधिक प्रवृत्ति आदि। मानव समाज में इन बुराईयों के होते हुए हम एक सुखी, समृद्ध, विकसित मानवीय जीवन की कल्पना नहीं कर सकते। ये बुराईयाँ मानव समाज के लिए एक अभिषाप है। इस अभिषाप को वरदान में बदलने के लिए तथा समाज में सकारात्मक जन-जागरण के लिए मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ कार्यरत है।

आध्यात्मिक आवश्यकता- मनुष्य का सांसारिक विकास तो बाह्य साधनों से हो सकता है, लेकिन आन्तरिक चेतनात्मक विकास होता है-विचारों से। विचार हमारे जीवन को दिशा प्रदान करते हैं । इसलिए उन्नत जीवन के लिए उन्नत सकारात्मक विचार होना जरूरी है। किन्तु आज हमारी सामाजिक व्यवस्था, असफलता, कुसंगति, गलत मार्गदर्शन, स्वार्थ और मानसिक अशान्ति के कारण विचारों का उन्नत होना और उनका परिष्कार होना रूक-सा गया है और समाज में हिंसा, अपराध, असन्तोष, दूषित खान-पान जैसी प्रवृत्तियाँ बढ़ती जा रही है। इसके परिणाम स्वरूप उन्नति समृद्धि शान्ति और सफलता से परिपूर्ण जीवन का अभाव होता जा रहा है। जीवन के इस अभाव को दूर करने के लिए जो मार्ग है उसका नाम है-ध्यान। ध्यान के माध्यम से अपने विचारों की सकारात्मक उर्जा द्वारा जीवन को उन्नत और समृद्ध बनाया जा सकता है। ध्यान आपकी उन्नति के लिए एक वरदान है और ध्यान की शक्ति से परिपूर्ण आप इस समाज के लिए एक वरदान हो।

इस प्रकार मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ सम्पूर्ण मानव समाज की सांसारिक और आध्यात्मिक उन्नति, सम्पूर्ण प्रकृति, पृथ्वी और जीव मात्र के मैत्रीपूर्ण संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्यरत है।

मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ का सिद्धान्त-

मनुष्य जब अपनी उन्नति के लिए सांसारिक और आध्यात्मिक सहयोग प्राप्त करता है तो यह सभी साधन और व्यक्ति उसके लिए एक वरदान है। जब इनकी सहायता से वह व्यक्ति अपने लक्ष्य और योग्यता को हासिल कर लेता है और स्वयं कृतज्ञ भाव से सांसारिक एवं आध्यात्मिक साधनों के माध्यम से संसार को सुन्दर बनाने का प्रयास करता है तो वह व्यक्ति सम्पूर्ण संसार और मानवता के लिए एक वरदान बनता है।

मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ परस्पर विकास की एक विचारधारा है जिसमें कृतज्ञता का भाव है । जब योग्य बनकर मनुष्य समाज के लिए अपने सामथ्र्य के अनुसार सहयोग करता है तो यह सहयोग उसका समाज के प्रति एक धन्यवाद है। समर्थ और योग्य व्यक्ति का सहयोग के रूप में यह धन्यवाद ज्ञापन सम्पूर्ण समाज के लिए एक वरदान बनता है।

समर्थ और योग्य व्यक्ति को वरदान बनने से कौन रोकता है ?

समर्थ और योग्य व्यक्ति को वरदान बनने से रोकता है- स्वार्थ, लालची प्रवृत्ति, व्यक्तिवादी संकीर्ण सोच ।

जरा सोचें ! यदि यह योग्य और समर्थ समाज, परिवार और आध्यात्मिक जगत् आपके लिए वरदान नहीं बनता तो आप सांसारिक और मानसिक विकारों, संघर्षो और बुराईयों से ग्रस्त होकर नष्ट हो जाते या वहाँ नहीं पहुच पाते जहाँ आज है। वैसे ही यदि आप जैसे योग्य और समर्थ व्यक्ति समाज और आध्यात्मिक जगत् के लिए वरदान नहीं बने तो यह समाज और आध्यात्मिक जगत् विकारों से दूषित हो जायेगा।

आपसे आत्मीय निवेदन है अपनी योग्यता और सामथ्र्य के अनुसार मानव जगत् के लिए वरदान बनें। अपने सामाजिक और आध्यात्मिक दायित्वों के निर्वहन के लिए अपनी आत्म उन्नति के लिए मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ से जुड़े। मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ से जुड़कर मानव समाज में फैली बुराईयों को दूर करें और आप स्वयं के लिए, समाज के लिए, राष्ट्र और सम्पूर्ण जगत् के लिए वरदान बनें।

मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ का संकल्प है आपका विकास और आपके सहयोग से सबका विकास। इस कल्याणकारी कार्य में तन-मन-धन से सहयोग प्रदान करें। हमारी स्पष्ट मान्यता है कि आपका इस मिशन से जुड़ना मिशन के लिए एक वरदान बनेगा। इस संसार को सुन्दर बनाने में आपका प्रत्येक प्रकार का सहयोग, कार्य और विचार आपको इस संसार के लिए एक वरदान बनाता है

मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ कैसे कार्य करता है-

मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ प्रकृति, समाज और व्यक्ति को हानि पहुचाने वाली उनकी उन्नति और विकास को रोकने वाली वृत्तियों और कार्यों के प्रति सकारात्मक जन-जागरण और उनके उन्मूलन के लिए यथार्थ कार्य करता है जैसे नशामुक्ति केन्द्र स्थापना, बिखरते परिवारों को जोड़ने के लिये परामर्श केन्द्र, निर्धनों के लिये निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था, स्वास्थ्य परीक्षण, रक्तदान शिविरों का आयोजन आदि।

मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ मनुष्य और समाज की आत्मिक उन्नति को रोकने वाली वृत्तियों और कार्यों के प्रति आत्म जागरण करते हुवे आत्मिक उन्नति के आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक साधन उपलब्ध कराता है जैसे-सत्संग, आध्यात्मिक परामर्शए शंका समाधान, अपने संस्कार और संस्कृति के प्रति अनुराग, प्राच्य विधाओं योग, ध्यान-ज्योतिष-आगमशास्त्र का समाज हित में प्रयोग करके इन विधाओं को समाज और संसार के लिये वरदान बनाना।

मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ के अन्तर्गत जन-जागरण के लिये विभिन्न अवसरो पर सेमिनार व्याख्यान आदि का आयोजन करना।

सोच क्या रहे हैं अपने जीवन को दीजिए एक नया आयाम और सभी के लिये बनें वरदान ।

मिशन-‘‘वरदान बनों‘‘ से जुड़े।

यदि मिशन-"वरदान बनो" द्वारा आयोजित किये जाने वाले -

  • सत्संग, प्रवचन, व्याख्यान, ध्यान, योग शिविरों में आप आना चाहते हैं ।
  • विभन्न जयन्ती और दिवसों पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में सम्मिलित होना चाहते हैं ।
  • मिशन - "वरदान बनो" को किसी भी प्रकार का सहयोग देना चाहते हैं ।
  • मिशन - "वरदान बनो" से वरदान (सक्रिय सदस्य ) के रूप में जुड़ना चाहते हैं,
    तो अभी बात करें मोबा. 098263-88068 पर |