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गुरुदेव के बारे में

गुरूदेव डॉ. सर्वेश्वर शर्मा

गुरूदेव डॉ. सर्वेश्वर शर्मा का जन्म 8 अगस्त, 1971 को उज्जैन में हुआ। बचपन से ही ज्योतिष-अध्यात्म और साधना के क्षेत्र में रूचि के कारण आपने स्वयं इन विषयों का अध्ययन आरम्भ किया। इसके पश्चात प्रसिद्ध ज्योतिषी और चिकित्सक पंडित केसरीलाल जी व्यास से ज्योतिष और व्याकरण की शिक्षा प्राप्त की । फलित ज्योतिष के गूढ रहस्यों का अध्ययन एवं ज्ञान पद्म्भूषण पं. सूर्यनारायण व्यास के ज्येष्ठपुत्र डॉ. रश्मिकांत जी व्यास से प्राप्त किया। डॉ. सर्वेश्वर शर्मा दुर्लभ श्रीविद्या साधना के दीक्षा प्राप्त सिद्ध साधक है तथा आपके अनगिनत शिष्य देश विदेश में श्रीविद्या की साधना कर रहे है।

शिक्षा

डॉ. सर्वेश्वर शर्मा ने राजनीति शास्त्र में एम.ए., संस्कृत में एम.ए., फलित ज्योतिष में आचार्य (एम.ए.) और फलित ज्योतिष में ही पी.एच.डी. डिग्री प्राप्त की है।

सम्मान

डॉ. सर्वेश्वर शर्मा अपनी सटीक ज्योतिषीय भविष्यवाणियों, विशेष आध्यात्मिक शक्ति और हिलिंग-पावर के लिए विष्व भर में प्रसिद्ध है। डॉ. सर्वेश्वर शर्मा ने अनेक राष्ट्रीय एवं अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेकर ज्योतिष-वास्तु-ध्यानयोग-श्रीविद्या साधना और तंत्र मंत्र यंत्र जैसे गूढ विषयों पर अपने प्रभावशाली व्याख्यानों से सभी को चमत्कृत किया है। डॉ. सर्वेश्वर शर्मा को ज्योतिष और अध्यात्म के क्षेत्र में कार्य के फलस्वरूप अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। उज्जैन में सन् 2004 में आयोजित ज्योतिष महाकुंभ में शंकराचार्य जी द्वारा आपको सम्मानित किया गया ।

  • इंडियन ग्रेट एस्ट्रोलॉजर अवार्ड - सन् 2005 जगन्नाथ पुरी (उडिसा) में आयोजित अंर्तराष्ट्रीय ज्योतिष महासम्मेलन में डॉ. सर्वेश्वर शर्मा को इंडियन ग्रेट एस्ट्रोलॉजर अवार्ड और स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।
  • वास्तु-रत्न अवार्ड - कोणार्क (उडिसा) में वास्तु-रत्न अवार्ड और स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।
  • योग-विशारद - ध्यानयोग के क्षेत्र में कार्यो के लिए योग विशारद की उपाधि एवं स्वर्ण पदक प्रदान किया गया ।
  • देवज्ञ-शिरोमणि सम्मान -सन् 2006 में ज्योतिष के क्षेत्र में योगदान और उपलब्धियों के लिए देवज्ञ-शिरोमणि की उपाधि प्रदान की गई।
  • आर्यविग्रह-रत्न सम्मान - सन् 2007 नेशनल मिडिया-मेन वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा भोपाल के संस्कृति भवन में आर्यविग्रह-रत्न सम्मान प्रदान किया गया ।
  • तंत्र शिरोमणि सम्मान- सन् 2008 विदिषा में आयोजित अंर्तराष्ट्रीय ज्योतिष और तंत्र महासम्मेलन में साधना एवं तंत्र के क्षेत्र में किये गये कार्यों के लिये तंत्र शिरोमणि की उपाधि से सम्मानित किया गया।
  • ज्योतिष रत्न पुरस्कार-सन् 2010 में अखिल भारतीय विद्वत् परिषद द्वारा बनारस (काशी) में ज्योतिष के क्षेत्र में सेवा और उपलब्धि के लिए ज्योतिष रत्न पुरस्कार किया गया।
  • वराहमिहिर सम्मान-सन् 2010 में नवसंवत्-नवविचार संस्था द्वारा वराहमिहिर सम्मान प्रदान किया गया।

शिक्षा के क्षेत्र में कार्य

डॉ. सर्वेश्वर शर्मा ने अनेक जैन साधुओं को ज्योतिष और अध्यात्म विषय की षिक्षा प्रदान की। डॉ. सर्वेश्वर शर्मा ने सन् 2002 में शा. संस्कृत महाविद्यालय, भोपाल (म. प्र.) में ज्योतिष विषय के अतिथि व्याख्याता के रूप मे कार्य किया। सन् 2003 में बड़ौदा संस्कृत महाविद्यालय, बड़ौदा (गुजरात) में ज्योतिष विषय के अतिथि व्याख्याता के रूप में कार्य किया। सन् 2004 में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन (म.प्र.) के ज्योतिष विभाग में ज्योतिष और वास्तु के अतिथि व्याख्याता के रूप में सन् 2007 तक कार्य किया। सन् 2010 से लेकर वर्तमान समय में भी विक्रम विश्वविद्यालय में ज्योतिष एवं वास्तु विषय का अतिथि व्याख्याता के रूप में अध्यापन कार्य कर रहे हैं ।

दिव्य विभूतियाँ जिनकी वैचारिक और आध्यात्मिक ऊर्जा ने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से डॉ. सर्वेश्वर शर्मा को आध्यात्मिक और साधनात्मक गति प्रदान की -

  • पूज्य केवलानंद जी महाराज - 105 वर्षीय केवलानंद जी महाराज ओंकारेश्वर के सिद्ध पुरूष की आध्यात्मिक कृपा और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
  • पूज्य अवधूत नित्यानंद जी महाराज - इनका भी साधनात्मक आध्यात्मिक आशीर्वाद डॉ. सर्वेश्वर शर्मा को प्राप्त हुआ।
  • वामाचार्य भैरवानंद कपालिक - नेपाल के सिद्ध तंत्र साधक वामाचार्य भैरवानंद कपालिक का सानिध्य और आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
  • पूज्य गुरूदेव कुमारिल भाई शुक्ल - बड़ौदा निवासी श्रीविद्या के सिद्ध साधक कुमारिल भाई शुक्ल से डॉ. सर्वेश्वर शर्मा को दुर्लभ श्रीविद्या साधना की दीक्षा प्राप्त हुई।
  • डॉ. एल. एन. शर्मा - प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं प्रोफेसर के समतावादी उदार दृष्टिकोण तथा सादा जीवन उच्च विचार की जीवन शैली से डॉ. सर्वेश्वर शर्मा सदैव प्रभावित रहे हैं।
  • श्री अनिल शर्मा - इनके उच्चस्तरीय आध्यात्मिकता और आधुनिकता के समन्वयात्मक चिंतन का डॉ. सर्वेश्वर शर्मा पर गहरा प्रभाव रहा है।