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पूजा / जाप / अनुष्ठान

समस्याओं को नहीं समस्या के कारण को नष्ट किजिये। व्यक्ति के जीवन में एक समस्या के समाधान के साथ ही दूसरी समस्या पैदा हो जाती है, दूसरी के बाद तीसरी और इस प्रकार व्यक्ति का जीवन समस्याओं से लड़ते हुऐ ही गुजर जाता है, किंतु सुख और सफलता नहीं मिलती।

इसलिये श्रीविद्या साधक परिवार द्वारा सिद्ध साधक गुरूदेव डॉ. सर्वेश्वर शर्मा के सानिध्य और मार्गदर्शन में सम्पन्न होने वाले हवन/पूजा/अनुष्ठान आपकी समस्या को नहीं समस्या के कारण को मिटाते है।

  • महालक्ष्मी पूजन एवं हवन-
    कई बार पूरी मेहनत करने के बाद भी हमें वह सफलता और आर्थिक लाभ नहीं मिलता जो कि मिलना चाहिए। इस महालक्ष्मी पूजन एवं हवन अनुष्ठान से कार्यक्षमता बढ़ती है और आर्थिक उन्नति होती है।
  • महागणपति पूजन एवं हवन-
    आपके कार्यक्षेत्र में बार-बार उत्पन्न होने वाले विघ्नों के निवारण के लिए यह महागणपति पूजन एवं हवन अनुष्ठान सर्वश्रेष्ठ है। इसके प्रभाव से आपको सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है।
  • शनि की साढ़ेसाती एवं शनि की ढ़य्या शांति अनुष्ठान एवं हवन-
    शनि की ढ़य्या और शनि की साढ़ेसाती में होने वाले व्यापार घाटे, स्वास्थ्य हानि, मानसिक और पारिवारिक क्लेश, आर्थिक नुकसान, शत्रुता, कोर्ट केस जैसी समस्याओं के निवारण के लिए यह गोपनीय अनुष्ठान और हवन सम्पन्न किया जाता है। इसके प्रभाव से शनिकृत पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
  • संपूर्ण कालसर्प-दोष शांति अनुष्ठान-
    कालसर्प-दोष सामान्यतः 12 प्रकार का होता है। इनके नाम इस प्रकार है-अनंत कालसर्प दोष, कुलिक कालसर्प दोष, वासुकी कालसर्प दोष, शंखपाल कालसर्प दोष, पद्म कालसर्प दोष, महापद्म कालसर्प दोष, तक्षक कालसर्प दोष, कर्कोटेक कालसर्प दोष, शंखचूड़ कालसर्प दोष, घातक कालसर्प दोष, विषधर कालसर्प दोष, शेषनाग कालसर्प दोष। ये प्रमुख 12 प्रकार के कालसर्प दोष है किंतु जन्म कुंडली में विभिन्न लग्नों में बनने वाले इन कालसर्प दोषों का अलग-अलग प्रकार से जीवन में कुप्रभाव होता है। संपूर्ण कालसर्प दोष शांति अनुष्ठान से सभी प्रकार के कालसर्प दोषों का नाश हो जाता है और जीवन में सुख समृद्धि आती है।
  • संपूर्ण पितृदोष शांति अनुष्ठान-
    घर में सूनापन, परिवार का मुखिया बीमार रहना, परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव, बुरे सपने आना ये सब पितृदोष के लक्षण है। संपूर्ण पितृदोष शांति अनुष्ठान से समस्त प्रकार की जानी-अनजानी मृतात्माओं की शांति होती है और व्यक्ति को सभी प्रकार के पितृदोषों से मुक्ति मिल जाती है, इससे जीवन में शांति, उल्लास, समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • सम्पूर्ण वास्तु शांति अनुष्ठान-
    घर बनना सभी का सपना होता है लेकिन गृह निर्माण से लेकर गृह प्रवेश तक के समय में निर्माण के दौरान अनेक प्रकार के दोष उत्पन्न हो जाते है। इस दोषयुक्त गृह में प्रवेश के साथ ही व्यक्ति पर् आर्थिक, मानसिक मुसीबते आने लगती है। तब यही सपनों का घर अभिशाप लगने लगता है। संपूर्ण वास्तु शांति अनुष्ठान के प्रभाव से गृह निर्माण से गृह प्रवेश के बीच उत्पन्न होने वाले सम्पूर्ण दोषों का निवारण हो जाता है।

श्रीविद्या साधक परिवार द्वारा गुरूदेव के सानिध्य में सम्पन्न होने वाले अन्य विशेष अनुष्ठान निम्नानुसार है -

  • महाऐश्वर्य प्राप्ति अनुष्ठान-
    जीवन में परम ऐश्वर्य प्राप्ति, श्रेष्ठ सफलता प्राप्ति के लिए यह गोपनीय महाऐश्वर्य प्राप्ति अनुष्ठान संपन्न किया जाता है। यह अनुष्ठान व्यक्ति को सर्वोच्च सफलता प्रदान करता है।
  • राजयोग प्राप्ति अनुष्ठान-
    राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय या नेतृत्व की इच्छा रखने वाले व्यक्तियों के लिए यह अनुष्ठान सर्वश्रेष्ठ है। इस अनुष्ठान के प्रभाव से व्यक्ति को शासन-प्रशासन के क्षेत्र में, राजनीति के क्षेत्र में, चुनावों में विषेष सफलता और विजय प्राप्त होती है, प्रसिद्धि प्राप्त होती है, आकर्षण प्रभाव बढ़ता है जिसके कारण सभी आपके प्रति अनुकूल रहते है।
  • जन्मकुंडली शांति महाअनुष्ठान-
    जन्म कुंडली में अनेक प्रकार के दोष होते हैं जो लाख प्रयत्नों के बाद भी ज्योतिषियों को ज्ञात नहीं हो पाते। जिनके कारण व्यक्ति निरंतर आर्थिक, पारिवारिक, व्यापारिक और सामाजिक रूप से परेशान रहता है। जन्म कुंडली में स्थित इन संपूर्ण ज्ञात-अज्ञात दोषों की शांति के लिए जन्म कुंडली शांति महाअनुष्ठान संपन्न किया जाता है। यह एक दुर्लभ गोपनीय विधान है। इसको संपन्न करने से जन्म कुंडली में स्थित संपूर्ण दोषों की शांति हो जाती है।
  • महामृत्युंजय जप विधान (सवालाख जप और हवन)-
    बार-बार दुर्घटना (एक्सीडेंट) होना, लम्बी बिमारी, अचानर् आर्थिक हानि, मार्केश की दशा लगना, मानसिक क्लेष होना। इन सब समस्याओं से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय जप विधान संपन्न किया जाता है।
  • सर्वबाधा निवारण अनुष्ठान-
    योग्यता होने पर भी असफलता मिलना, उन्नति में विघ्न आना, कार्यक्षेत्र में शत्रुता बढ़ना, पदोन्नति न होना इन सब बाधाओं का निवारण सर्वबाधा निवारण अनुष्ठान से होता है और व्यक्ति को सफलता प्राप्त होती है।
  • विवाहबाधा निवारण अनुष्ठान-
    शादी नहीं होना, शादी होकर टूटना, बार-बार रिश्ते आना लेकिन शादी निश्चित न होना, पति-पत्नि के बीच क्लेष, मन-मुटाव जैसी समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए विवाह बाधा निवारण अनुष्ठान अत्यंत लाभप्रद है। इस अनुष्ठान के प्रभाव से शीघ्र शादी तय हो जाती है और इस कार्य में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती है। पति-पत्नि के मध्य प्रेम और संतुलन स्थापित होता है।
  • वैधव्यदोष निवारण अनुष्ठान-
    वैधव्य दोष सौभाग्यनाषक होता है। पति-पत्नि का जोड़ा यदि लंबे समय तक बना रहे तो ही दाम्पत्य जीवन सफल माना जाता है। वैधव्य दोष अनुष्ठान से वैधव्य दोष का निवारण होता है। यह अनुष्ठान जीवन साथी को लंबी आयु देता है। उसके स्वास्थ्य और सौभाग्य की रक्षा करता है।
  • संतानप्राप्ति अनुष्ठान-
    शादी के लंबे समय बाद भी संतान न होना, गर्भधारण के बाद बीच में ही गर्भपात होना, संतान होकर मर जाना, मृत संतान होना, केवल एक ही संतान होकर रह जाना अर्थात दूसरी संतान न होना। इस प्रकार की संतान संबंधी किसी भी समस्या से मुक्ति पाने के लिए संतान प्राप्ति अनुष्ठान संपन्न कराना चाहिए। इस अनुष्ठान के प्रभाव से शीघ्र संतान सुख की प्राप्ति होती है।
  • मंगल-दोष शांति हेतु-महामंगल अनुष्ठान-
    मंगल-दोष होने पर जीवन साथी का सुख प्राप्त नहीं होता, विवाह न होना, तलाक होना, जीवन साथी के स्वास्थ्य की हानि होना, इस प्रकार की अनेक बाधायें दाम्पत्य सुख का नाश करती है। इसके निवारण के लिए महामंगल अनुष्ठान के प्रभाव से जन्म कुंडली के मंगलदोष की शांति होती है और दाम्पत्य सुख की प्राप्ति होती है।
  • व्यापारवृद्धि अनुष्ठान -
    व्यापार की उन्नति न होना, उधारी में पैसा अटकना, व्यापार बंधन होना, व्यापार क्षेत्र में शत्रुता बढ़ना इस प्रकार की समस्याओं के निवारण के लिये व्यापार वृद्धि अनुष्ठान कराना चाहिये। इसके प्रभाव से लक्ष्मी का आगमन होता है, रुका हुआ व्यापार पुनः चालू होता है। व्यापार बंधन दूर होते है।
  • कर्जमुक्ति अनुष्ठान -
    कर्ज उतरने का नाम ही नहीं लेता, कर्ज चुकाने के लिये कर्ज लेना पड़ता है, समय पर पैसा नहीं दे पाते है, इस प्रकार की समस्याओं से मुक्ति पाने के लिये कर्ज मुक्ति अनुष्ठान सम्पन्न कराना चाहिये। इस अनुष्ठान के प्रभाव से कर्ज से मुक्ति मिलती है और आर्थिक उन्नति प्राप्त होती है।
  • सिद्ध-वागिश्वरी अनुष्ठान -
    विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति कम होना, परीक्षा में बार-बार फेल होना, मेहनत करने के बाद भी परीक्षा में अच्छे अंक न आना इस प्रकार की सभी समस्याओं का समाधान है-सिद्ध वागिश्वरी अनुष्ठान। इस अनुष्ठान को सम्पन्न कराने से विद्यार्थियों की पढ़ाई (अध्ययन) संबंधित समस्त समस्याओं का समाधान हो जाता है।
  • महालक्ष्मी जप और हवन (आजीवन संकल्प)-
    जीवन में चिरस्थाई ऐश्वर्य, सम्पन्नता और सुख प्राप्ति के लिये, आपके द्वारा महालक्ष्मी जप का आजीवन संकल्प लेने पर श्रीविद्या साधक परिवार द्वारा नियत आचार्य आपके लिये नियमित रूप से नित्य महालक्ष्मी जप और हवन करते हैं।
  • नौकरी बाधा निवारण अनुष्ठान -
    पदोन्नति नहीं होती, ऑफिस में सहकर्मियों का सहयोग नहीं मिलता, उच्चाधिकारी नाराज रहते है, बार-बार नौकरी छूट जाती है, लम्बें समय से नौकरी नहीं मिल रही है- इस प्रकार की सभी समस्याओं के निवारण के लिये, नौकरी बाधा निवारण अनुष्ठान सम्पन्न करायें। इसके प्रभाव से नौकरी प्राप्त होती है, नौकरी में स्थायित्व आता है।